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राधा-कृष्ण के प्रेम और विछोह की मार्मिक कथा

राधा कृष्ण का अविभाज्य स्वरूप  कृष्ण बचपन में प्यारी प्यारी शैतानियाँ किया करते थे । एक बार सजा के बतौर कृष्ण की माता यशोदा ने कृष्ण को ओखल से बाँध दिया तब ठीक उसी समय राधा वहां आ पहुँची । राधा की कृष्ण से यह पहली मुलाकात थी । कृष्ण को देखकर राधा को उनसे प्रेम हो गया । उनके मिलन की यूं तो अलग अलग कई कहानियाँ हैं। कई जगह लोगों ने उल्लेख किया है कि राधा पहली बार गोकुल अपने पिता वृषभानु जी के साथ आई थी तब श्रीकृष्ण को उन्होंने पहली बार देखा था।इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि पहली बार संकेत तीर्थ पर दोनों आपस में मिले थे । बहरहाल ओखल से बंधे कृष्ण को देखकर राधा के दिल में प्यार उमड़ आया , उन्हें लगा कि उनका रिश्ता तो जन्म जन्म का है । कृष्ण के भीतर भी राधा के लिए वही प्यार उमड़ने लगा । दोनों एक दूसरे को देखकर एकदम बेसुध होने लगे थे । भक्त और भगवान का रिश्ता जन्म जन्म का होता है , जब भक्त और भगवान साक्षात मिलते हैं तो आपस में बातें नहीं होतीं बल्कि वे एक दूसरे को दिल से , भाव से महसूस करते हैं । राधा और कृष्ण का प्रेम भी भावों पर आधारित प्रेम है जो अद्वितीय है और उसका कोई विकल्प नहीं है। ...

आध्यात्म क्या है ?what is spirituality?

क्या दुनिया में भगवान की मौजूदगी है ?इस तरह का सवाल पूछने वाले के नजरिए में यह बात बैठी रहती है कि भगवान को भौतिकीय या स्थूल रूप में मनुष्य की तरह सामने पेश किया जाए जोकि कदापि संभव नहीं है, पर इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि भगवान नहीं हैं। भगवान दुनिया में हैं पर किसी अन्य रूप में उनकी मौजूदगी है जिसे समय समय पर अपने जीवन में हमें एहसास होते रहता है। ईश्वर, प्रेम और विश्वास के रूप में दुनिया के हर एक कोनों में विद्यमान है।

अफवाहें,अविश्वास, गलतफहमियों इत्यादि की उम्र लंबी नहीं होती पर क्या कारण है कि ईश्वर को मानने वालों के मन में जो विश्वास है वह कभी टूटता नहीं है। कोई बच्चा बीमार होता है। तमाम तरह की चिकित्सा उसकी हो चुकी होती है। डॉक्टर सुना चुके होते हैं कि वह जिंदा नहीं बच सकता पर कई बार चमत्कार होता है , माता-पिता का अटूट विश्वास उस बच्चे को बचा लेता है ।

विश्वास का यह एहसास ही ईश्वर का एक अमूर्त रूप है जो मनुष्य को भीतर से शक्ति देता है, उसके भीतर शांति का संचार करता है। मैं अपने बच्चियों को उनके बचपन में कार्मेल स्कूल छोड़ने जाया करती थी । आते जाते हुए स्कूल की दीवार पर एक कोटेशन मुझे हमेशा पढ़ने को मिलता था-- "Jesus is a friend who comes in when the world has walked out" 

इस कोटेशन को पढ़कर मेरे भीतर जो एहसास पैदा होते थे उससे मुझे उर्जा मिलती थी।  मेरे भीतर शांति का संचार होता था। ईश्वर को मैंने अपने जीवन में इसी रूप में देखा है। एक लंबी जीवन यात्रा में अनेक अमूर्त रूपों में ईश्वर हमारे जीवन में आते हैं और अपने होने का एहसास कराते हैं।

जो इन एहसासों का आकलन कर पाता है वही ईश्वर को महसूस कर पाता है।

एक बच्चे का अपने माता-पिता के ऊपर हमेशा एक विश्वास होता है कि उसके माता-पिता उसे कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

लोग डॉगी पालते हैं । डॉगी अपने मालिक के आसपास इस भाव और विश्वास से सोया रहता है कि उसका मालिक उसे कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

एक बेटी को अपने पिता पर इतना विश्वास होता है कि उसके पिता उसका कभी भी नुकसान नहीं करेंगे।

तो यह जो अटूट विश्वास है जो दुनिया में कई कई रूपों में मौजूद है ,दरअसल यही विश्वास ईश्वर की मौजूदगी का हमें एहसास कराता है।

अध्यात्म वह दर्शन है जिसके तहत हम ईश्वर को उसके अमूर्त रूप में खोजते हैं और उसे दिल की गहराइयों में महसूस करते हैं। यह खोज अनंत रूपों में फैली हुई है । 

- प्रतिमा शर्मा



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