अफवाहें,अविश्वास, गलतफहमियों इत्यादि की उम्र लंबी नहीं होती पर क्या कारण है कि ईश्वर को मानने वालों के मन में जो विश्वास है वह कभी टूटता नहीं है। कोई बच्चा बीमार होता है। तमाम तरह की चिकित्सा उसकी हो चुकी होती है। डॉक्टर सुना चुके होते हैं कि वह जिंदा नहीं बच सकता पर कई बार चमत्कार होता है , माता-पिता का अटूट विश्वास उस बच्चे को बचा लेता है ।
विश्वास का यह एहसास ही ईश्वर का एक अमूर्त रूप है जो मनुष्य को भीतर से शक्ति देता है, उसके भीतर शांति का संचार करता है। मैं अपने बच्चियों को उनके बचपन में कार्मेल स्कूल छोड़ने जाया करती थी । आते जाते हुए स्कूल की दीवार पर एक कोटेशन मुझे हमेशा पढ़ने को मिलता था-- "Jesus is a friend who comes in when the world has walked out"
इस कोटेशन को पढ़कर मेरे भीतर जो एहसास पैदा होते थे उससे मुझे उर्जा मिलती थी। मेरे भीतर शांति का संचार होता था। ईश्वर को मैंने अपने जीवन में इसी रूप में देखा है। एक लंबी जीवन यात्रा में अनेक अमूर्त रूपों में ईश्वर हमारे जीवन में आते हैं और अपने होने का एहसास कराते हैं।
जो इन एहसासों का आकलन कर पाता है वही ईश्वर को महसूस कर पाता है।
एक बच्चे का अपने माता-पिता के ऊपर हमेशा एक विश्वास होता है कि उसके माता-पिता उसे कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
लोग डॉगी पालते हैं । डॉगी अपने मालिक के आसपास इस भाव और विश्वास से सोया रहता है कि उसका मालिक उसे कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
एक बेटी को अपने पिता पर इतना विश्वास होता है कि उसके पिता उसका कभी भी नुकसान नहीं करेंगे।
तो यह जो अटूट विश्वास है जो दुनिया में कई कई रूपों में मौजूद है ,दरअसल यही विश्वास ईश्वर की मौजूदगी का हमें एहसास कराता है।
अध्यात्म वह दर्शन है जिसके तहत हम ईश्वर को उसके अमूर्त रूप में खोजते हैं और उसे दिल की गहराइयों में महसूस करते हैं। यह खोज अनंत रूपों में फैली हुई है ।
- प्रतिमा शर्मा

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